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कंप्यूटर और मानवीय मस्तिष्क

कल्पनाशीलता अथवा रचनात्मकता कंप्यूटरों की सीमा के बाहर है. जिस किसी काम की कभी कल्पना नहीं की गई हो कंप्यूटर उसे नहीं कर सकते जबकि मानवीय मस्तिष्क इस सीमा को लांघने की शक्ति रखता है. कंप्यूटर मानवीय मस्तिष्क से संभव हो सकने वाले कामो में से बहुत कम काम ही कर सकता है इसलिए कंप्यूटर मानव के दास की भूमिका में ही केवल सटीक बैठता है. कंप्यूटर जो भी काम कर सकता है दरसल वो मानवीय मस्तिष्क का ही देन होता हैं. हरेक एक मनुष्य का मस्तिष्क अलग अलग होता है, वो एक ही काम को अलग अलग तरीकों से करेगा, परन्तु १० या १००० एक जैसा तैयार किया गया कंप्यूटर एक जैसा ही काम करता है.

कंप्यूटर प्रोग्रामर (जो कंप्यूटर को निर्देषित करता है) कंप्यूटर को पहले बतलाता है की ________ + _______ = ? का अगर कहीं जवाब देना हैं तो खाली जगह में भरा गया पहले नंबर का बिट  और दूसरे नंबर की बिट को जोड़ने पर जो भी बिट आयेगी उससे पुनः डिजिटल में प्रदर्शित करना है. इसके बाद जब भी कोई यूसर (जो बनाये गए प्रोग्राम को उपयोग करता है) ______+______=? के जगह ५ + ४ = ? पूछेगा तो कंप्यूटर तुरंत ५+४ = ९ को प्रदर्शित कर देगा. इसके बदले अगर वह बार बार कोई अलग संख्या भी देगा तो उससे तुरंत जवाब मिलेगा.

 

Comments on: "23. कंप्यूटर और मानवीय मस्तिष्क" (2)

  1. its a very good site…excellent work done by Samidha foundation.all the best.

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